Wednesday, October 7, 2009

A Great Day for motivation to young Indian beginners as scientist

एक और नोबेल पर भारत का नाम
लंदन। भारतीय मूल के अमेरिकी वेंकटरमन रामकृष्णन ने नोबेल पुरस्कार जीत कर दुनिया में भारत का नाम रोशन किया है। उन्हें रसायन विज्ञान के क्षेत्र में वर्ष 2009 का नोबेल पुरस्कार मिलेगा। उन्हें इस पुरस्कार के लिए अमेरिकी वैज्ञानिक थामस ए. स्टेट्ज और इजरायल की वैज्ञानिक अदा ई. योनथ के साथ संयुक्त रूप से चुना गया है। इन तीनों को राइबोसोम की संरचना और इसकी कार्यप्रणाली के संबंध में किए गए महत्वपूर्ण अध्ययन के लिए यह सम्मान दिया जाएगा। रायल स्वीडिश एकेडेमी आफ साइंसेज की ओर से यह घोषणा की गई।

एकेडेमी के मुताबिक तीनों वैज्ञानिकों ने राइबोसोम का त्रिविमीय [3-डी] माडल बनाया, जिससे यह पता चला कि किस तरह विभिन्न एंटीबायोटिक और राइबोसोम आपस में जुड़े रहते हैं। वेंकटरमन ने थामस और योनाथ के साथ मिल कर राइबोसोम के बारे में कई उपयोगी जानकारियां इकट्ठी कीं, जिनकी मदद से कई बीमारियों से बचाव के लिए एंटीबायोटिक बनाने में मदद मिली। इन तीनों ने 'एक्स-रे क्रिस्टलोग्राफी' तकनीक से उन लाखों परमाणुओं की गतिविधियों का अध्ययन किया जो हमारे शरीर की कोशिका में प्रोटीन का निर्माण करने वाले राइबोसोम का निर्माण करते हैं।

रसायन विज्ञान के क्षेत्र में इस अद्भुत योगदान के लिए तीनों वैज्ञानिकों को नोबेल पुरस्कार के रूप में 14 लाख अमेरिकी डालर [करीब सात करोड़ रुपये] मिलेंगे। यह रकम तीनों में बराबर-बराबर बंटेगी। वेंकटरमन ने इस पुरस्कार के लिए अपने साथी वैज्ञानिकों और सहयोगियों का आभार जताया है। अति मुदित वेंकटरमन ने कहा, 'मैं अपने प्रखर सहयोगियों, छात्रों और मेरे लैब में काम करने वाले तमाम शोधकर्ताओं का तहे दिल से ऋणी हूं, क्योंकि विज्ञान सामूहिकता से जुड़ा क्षेत्र है।'

वेंकटरमन से पहले छह और भारतीय या भारतीय मूल के वैज्ञानिक प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार पा चुके हैं। इनमें रवींद्र नाथ टैगोर [साहित्य], सी.वी. रमन [भौतिकी], हरगोविंद खुराना [मेडिसिन व फिजियोलाजी], सुब्रह्माण्यम चंद्रशेखर [भौतिकी], अम‌र्त्य सेन [अर्थशास्त्र] और वी.एस. नायपाल [साहित्य] के नाम शामिल हैं।

अपने मित्रों के बीच 'वेंकी' नाम से लोकप्रिय वेंकटरमन इन दिनों कैंब्रिज, इंग्लैंड के एमआरसी लेबोरेटरी आफ मोलेक्यूलर बायोलाजी के स्ट्रक्चरल स्टडीज डिवीजन के प्रमुख हैं। वह नोबेल पुरस्कार पाने वाले इस लेबोरेटरी के तेरहवें वैज्ञानिक हैं। 69 साल की स्टेट्ज येल यूनिवर्सिटी में मोलेक्यूलर बायोफिजिक्स एंड बायोकेमिस्ट्री विभाग में प्रोफेसर हैं, जबकि योनाथ इजरायल के वेजमैन इंस्टीट्यूट आफ साइंस में स्ट्रक्चरल बायोलाजी विभाग में प्रोफेसर हैं।

चिदंबरम का लाल रामकृष्णन

वेंकटरमन रामकृष्णन का जन्म 1952 में मंदिरों के शहर चिदंबरम, तमिलनाडु में हुआ। 1971 में उन्होंने बड़ौदा विश्वविद्यालय से भौतिकी में स्नातक किया। उसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए वह अमेरिका चले गए। ओहायो यूनिवर्सिटी से पीएच.डी करने के बाद 1976-78 तक उन्होंने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में पढ़ाया। बाद में उन्होंने अमेरिका की नागरिकता हासिल कर ली।

येल यूनिवर्सिटी से पोस्ट डाक्टरल रिसर्च करने के दौरान उन्होंने एंटीबायोटिक में अहम कारक रायबोसोम की संरचना और कार्य प्रणाली पर गहराई से अध्ययन किया। आजकल वह कैम्ब्रिज के मोलक्यूलर बायोलोजी विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं और उनके कई शोध पत्र अति महत्वपूर्ण पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।

21 सितंबर, 2000 को नेचर पत्रिका में रामकृष्णन के दो शोध पत्र प्रकाशित हुए। इनमें पहली बार उन्होंने 30एस रायबोसोम के 3 आगस्ट्रम संरचना की तीन सह ईकाई पर प्रकाश डाला।

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